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यूपी का नारा : मेरी जाति मेरा वोट

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यूपी में जब भी चुनाव होते हैं तो दो चीजें प्रमुख होती हैं एक शराब और पैसों का लालच और दूसरा जाति का लालीपाप. शराब और पैसा देना तो यूपी चुनावों की खास बात रहती है. शाम हुई नहीं कि विभिन्न कार्यालयों में चोरी-छुपे बोतलें पहुंचतीं और घर-घर में बंटती हैं. पैसा अक्सर या तो वोट से एक रात पहले या फिर प्रचार के आखिरी दिन दिया जाता है. लेकिन जाति के नाम पर लोगों के जमीर से वोट तो मानो पूरे चुनावी समर में ही मांगा जाता है. यह वह एक मुद्दा है जिससे यूपी हो या बिहार कभी अलग नहीं हुए.


UP ELECTIONSमेरी जाति के लिए मेरा वोट है!

यूं तो जाति के नाम पर देश के कई हिस्सों में वोट मांगा जाता है लेकिन यूपी और बिहार में जातिवाद ही सबसे प्रभावी मुद्दा होता है. इस बार भी यूपी विधानसभा चुनाव में जाति का नाम लेकर ही नेता वोट मांग रहे हैं. बड़ी-बड़ी रैलियों में वैसे तो नेता बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन जब बात अपने स्तर की आती हैं तो सारी सभाएं जातिगत ही रखी जाती हैं.


यूपी में भ्रष्टाचार को लेकर न तो कहीं कोई आक्रोश, न विकास को लेकर कोई ललक है. हैरानी है भ्रष्टाचार और विकास के मुद्दे पर कहीं बात होते नहीं दिख रही है. दिखाई दे रहा है तो बस जातियों में बंटा वोटर, जिनके लिए फिलवक्त अपनी बिरादरी की जीत ही सबसे अहम है. नतीजा प्रत्याशियों की जीत-हार का सारा दारोमदार जातीय समीकरणों पर आकर टिक गया है. प्रत्याशी मुद्दों पर चुनाव लड़ने के बजाय जातीय समीकरण दुरुस्त करने में ही जोर लगाए हुए हैं.


कहीं बुनकर बनाम गैर बुनकर मुसलमानों की लड़ाई हैं तो कहीं यादव बनाम प्रसाद. जातियों में बंटी यूपी को शक्ति देती हैं यहां की ठाठ पंचायतें जो जाति और धर्म के नाम पर मर मिटने को तैयार रहती हैं. आज यूपी का जो शहरी चेहरा आप देखते हैं वह तो सिर्फ नाम मात्र का है असली तस्वीर तो ठाठ यूपी की है जहां की कमान बुजुर्ग और प्रौढ़ लोगों के हाथ में है. यह लोग विकास या भ्रष्टाचार के नाम पर बेशक सरकार बदलने की बातें करें लेकिन जब बात अपनी जाति के नेता को वोट देने की आती है तो भ्रष्टाचार, महंगाई और कोई अन्य मुद्दा कोई मायने नहीं रखता.


देश में जाति हमेशा से ही नेताओं के लिए मीठा फल देने वाला पेड़ रही है और इस बार भी कोई नई कहानी नहीं लिखी जाएगी. लखनऊ, बनारस जैसे बड़े शहरों के वोटर भले ही विकास या भ्रष्टाचार के खात्मे के नाम पर वोट डाल दें लेकिन देश का दिल यानि देहात-गांव तो वोट जाति के नाम पर ही देगा.

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sandeep के द्वारा
February 3, 2012

यह तो हर जगह का खेल है जनाब .. जाति के नाम पर ही अधिकतर लोग वोट डालते हैं यहां


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